रात - एक नया नज़रिया। रात - एक नया नज़रिया।
वक्त बदला बड़े बूढ़े हुए बच्चे बड़े हुए हर चिड़े ने बना लिया अपना अलग घोंसला वक्त बदला बड़े बूढ़े हुए बच्चे बड़े हुए हर चिड़े ने बना लिया अपना अलग...
जब चार घाव लगाता तब देखता, प्रांगण में मुक्त खेल रहे बच्चों को! जब चार घाव लगाता तब देखता, प्रांगण में मुक्त खेल रहे बच्चों को!
बे मौसम बरसात बहुत है। कर्जे की सौगात बहुत है। बे मौसम बरसात बहुत है। कर्जे की सौगात बहुत है।
असफलताओं से सीख लो विश्वास रखो खुद पर कदम आगे बढ़ाओ, असफलताओं से सीख लो विश्वास रखो खुद पर कदम आगे बढ़ाओ,
कभी देती मखमली सी राहें तो कभी दर्द का जाल बिछाती है, कभी देती मखमली सी राहें तो कभी दर्द का जाल बिछाती है,